मंगलवार, 10 नवंबर 2009

एक शहीद की जेल डायरी


भगत सिंह की जेल डायरी पढ़ी। कई ऐसी बातें मालूम हुई जिनसे मैं अभी तक अनभिज्ञ था । भगत सिंह हर किताब को पढ़ने के बाद, जो उन्हें अच्छा लगता उसे वे अपनी डायरी में उतार लेते थे। खासकर वे परिभाषाएं जो उनके तर्कों की कसोटी पर खरी उतर जाती थी। वे बाकायदा उस किताब और उसके लेखक का नाम , पेज नंबर तक डालते थे। उसके बाद तीन या चार लाइन में अपने तर्क लिखते थे। किरती और प्रताप में छपे उनके लेख उनकी डायरी के लिखे तथ्यों और परिभाषाओं का विश्लेषण हुआ करते थे। बहुत कम लोगो को यह बात मालूम होगी की उन्होंने जेल में चार किताबे भी लिखीं थीं। जिनकी पाण्डुलिपि आजतक सामने नही आ पाने के कारन लोग इस पहलू से अनजान हैं। उनकी लिखी किताबों में --- दी रिवोलुश्नरी हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया, इत दी डोर ऑफ़ डेथ, अपनी आत्मकथा । एक अन्य ओर।

1 टिप्पणी:

Sandip Naik, Main Zindagi ka sath nibhata chala gaya......... ने कहा…

Dear Hari
Congrats for coming up with your world of expressions, its really nice to see and read your comments on Bhagat Singh " jab aagaz hi Bhagat Singh se ho to Anjam kya hoga...... inshaallah....!!! Keep writitng and be Honest.. dont be a typical journalist.
Love & Blessings
Sandip Naik