रविवार, 27 दिसंबर 2009

प्रभाष जोशी न्यास

आलोक तोमर जी ने अपने जन्मदिन (27 दिसंबर) पर अपने गुरू प्रभाष जोशी जी के नाम पर एक न्यास बनाया है. इस न्यास के तहत उन उद्देश्यों और क्रियाकलापों को जीवित रखा जाएगा, जो प्रभाष जी करना चाहते थे. प्रभाष जी के जाने के बाद कागद कारे पढऩे को नहीं मिलता. लेकिन आलोक जी के लेखों में वही तासीर देखने को मिलती है जो कागद कारे में हुआ करती थी। पिछले दिनों भड़ास फॉर मीडिय़ा पर उन्होंने अपने लेखों से जिस तरह कुछ मीडिया संस्थानों पर निशाना साधा है वह सब लिखने की ताकत हर किसी में नहीं है. वह तो सिर्फ कागद कार में ही पढऩे को मिलता था.

1 टिप्पणी:

rahul kumar ने कहा…

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